Saturday, September 29, 2012

लाल



लाल सी लालिमा किसी और रंग में है कहाँ?

सुर्ख सा मदिरा में खुशी छलकाता हुआ
भोर में सूरज को जीवन देता
ये लाल रंग, वो लाल रंग
सुहागन का स्वप्न अपनी गोद मे समेटता हुआ
दुर्गा के दुर्ग की चारदीवारी को रंगता
ये लाल रंग, वो लाल रंग
अचल सा शव में खौफ़ दिखलता हुआ
क्या सौभाग्य की निशानी, या है जंजीरों का रंग
ये लाल रंग, वो लाल रंग |

Thursday, September 27, 2012

तब और अब

धरती से जोड़ती थी,
आलती-पालती और खाने की थाली
आष्टा-चंगा-पे और लंगड़ी-पुआ
नानी का घर और छत का बिस्तर |
अब बस ज़मीन के कुछ ऊपर है,
कुर्सियों से लटकते पैर और Frozen food
SAP और Solitare
Sleepwell का गद्दा और निद्राहीन रातें |